रथ केर पहिया प्राण बैन टुटल अइ नयन प्रतीक्षारत बिछायल जाल खोइल दिय अहा केर भाव मे हम बुन्द बुन्द भिजलौ ओहि भाव बिभोर स मुक्त क दिय हमरा किछ कह लेल अनुमती दिय बस अनुमती दिय किछो देखबाक लेल इजोरिया राइत मे चेहरा चान्द सन हम सजौने रहि मुदा ओहि मे नुकायल अन्हरिया छिपल काजर सन कारी राइत तकरा फेर स अहा लग बखान कर दिय हमरा .... बस अनुमती दिय जिवनक अहि भवर मे रणेवने हम अकेले भटकलौ अहा केर नाम अहा केर शृङ्गार जीवन भैर कोमल हाथ स उठेलौ हम अहि ठोकर मार्ग स अन्जान रहि ओहि बितल मार्ग के उघार कर दिय हमरा... बस अनुमती दिय रचना: प्रतिभा झा
I came to see you today
But could not be found
I'm just looking at you today
I hope to tell you something
My lips remained silent.
There was an attempt to call you
I Sound ....
My voice was loud ....
But I can't say anything ....
Time stopped
Trying to call you
Repeatedly
But my lips remained silent
I came back from that
I never met him
Hope so
When will the sound come out of my lips,
And I will tell him that word of my heart .....
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