रथ केर पहिया प्राण बैन टुटल अइ नयन प्रतीक्षारत बिछायल जाल खोइल दिय अहा केर भाव मे हम बुन्द बुन्द भिजलौ ओहि भाव बिभोर स मुक्त क दिय हमरा किछ कह लेल अनुमती दिय बस अनुमती दिय किछो देखबाक लेल इजोरिया राइत मे चेहरा चान्द सन हम सजौने रहि मुदा ओहि मे नुकायल अन्हरिया छिपल काजर सन कारी राइत तकरा फेर स अहा लग बखान कर दिय हमरा .... बस अनुमती दिय जिवनक अहि भवर मे रणेवने हम अकेले भटकलौ अहा केर नाम अहा केर शृङ्गार जीवन भैर कोमल हाथ स उठेलौ हम अहि ठोकर मार्ग स अन्जान रहि ओहि बितल मार्ग के उघार कर दिय हमरा... बस अनुमती दिय रचना: प्रतिभा झा
ब्रह्माण्डके सार्थक हे माँ शक्ति
उम्मिद के किरण अछि
समंदर के गहराई मे क रहल छी भक्ति
दिपक उजाला के प्रतीक्षा अछि
कोमल मन अछि माँ कोमल भावना के अछि बास
मनुष्य पर परिन्दा के पर के बास
माँ दिय प्रेणादायक सफलता के शुरुआत
मटका के बुँद-बुँद के पानी
देखाऊ माँ जिन्दगी के सही जमिन के कात
माँ भगवती धर्म के आस्था जीवित अछि हमारा मनमे
एके माला गाथब,पहिरब हम एके हाथ
फुल गाइछ के डाली सुखल भवन मे
अहंकार,घमण्ड संग इर्श्या
रचना,
प्रतिभा झा
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